Monday, 25 May 2020, 4:02 AM

जीवन मंत्र

प्रतिभा और ज्ञान 

Updated on 24 May, 2020, 6:00
एक संत को जंगल में एक नवजात शिशु मिला। वह उसे अपने घर जे आए। उन्होंने उसका नाम जीवक रखा। उन्होंने जीवक को अच्छी शिक्षा-दीक्षा प्रदान की। जब वह बड़ा हुआ तो उसने संत से पूछा, 'गुरुजी, मेरे माता-पिता कौन हैं?' संत को जीवक के मुंह से यह सुनकर बड़ा... Read More

 संकल्प और साहस  

Updated on 23 May, 2020, 6:00
खेल की कक्षा शुरू हुई तो एक दुबली-पतली अपंग लड़की किसी तरह अपनी जगह से उठी। वह खेलों के प्रति जिज्ञासा प्रकट करते हुए शिक्षक से ओलिंपिक रेकॉर्ड्स के बारे में सवाल पूछने लगी। इस पर सभी छात्र हंस पड़े। शिक्षक ने भी व्यंग्य किया- तुम खेलों के बारे में... Read More

चिंतन सही हो 

Updated on 19 May, 2020, 6:00
एक व्यक्ति ने अपने मित्र से साठ रूपए उधार लिए। कुछ दिनों बाद वह आया और बीस रूपए देकर बोला, 'सारे रूपए आ गए?' मित्र ने कहा, 'साठ दिए थे और तुम बीस लौटा रहे हो, तो अभी चालीस रूपए बाकी रहेंगे। तीस और तीस साठ होते हैं।' उसने कहा,... Read More

 धर्म का अर्थ

Updated on 18 May, 2020, 6:00
किसी संत के पास एक युवक आया और उसने उनसे धर्म ज्ञान देने की प्रार्थना की। संत ने कहा कि वह उनके साथ कुछ दिन रहे, फिर वे उसे धर्म का सार बताएंगे। युवक उनके आश्रम में रहने लगा। वह संत की हर बात मानता और उनकी सेवा करता। इस... Read More

आत्मज्ञान के लिए पात्रता

Updated on 17 May, 2020, 6:00
एक बार की बात है। एक धनिक सेठ एक पहुंचे हुए संत के पास पहुंचा और उनसे बोला, 'महाराज, मैं आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए साधना का प्रयास करता हूं। परंतु मेरा मन ध्यान में एकाग्र ही नहीं हो पाता। आप मुझे मेरे मन को एकाग्र करने का कोई मंत्र... Read More

हम असंतुष्ट रहेंगे तो जीवन में अशांति बनी रहेगी और हम कभी भी सुखी नहीं हो सकते

Updated on 16 May, 2020, 6:45
जो लोग अपने जीवन से असंतुष्ट रहते हैं, उनका मन कभी भी शांत नहीं हो सकता है। सुख-शांति पाना चाहते हैं तो जीवन में संतुष्टि होनी चाहिए। इस संबंध में एक लोक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार पुराने समय में एक किसान गरीबी की वजह से बहुत परेशान रहता... Read More

 दूसरे की गलती

Updated on 15 May, 2020, 6:00
एक बार गुरु श्यामानंद ने अपने चार शिष्यों को एक पाठ पढ़ाया। पढ़ाने के बाद वह अपने शिष्यों से बोले, 'अब तुम चारों इस पाठ का बार-बार अध्ययन कर इसे याद करो। इस बीच यह ध्यान रखना कि तुम में से कोई बोले नहीं। थोड़ी देर बाद मैं तुमसे इस... Read More

 संत का धन

Updated on 14 May, 2020, 6:00
उन दिनों विजय नगर में संत पुरंदर की ख्याति बढ़ती ही जा रही थी। हर प्रकार के मोह-माया से मुक्त त्यागमूर्ति पुरंदर अपनी पत्नी के साथ नगर से बाहर एक कुटिया में रहते थे और भिक्षा मांग कर गुजारा करते थे। उनके नाम की चर्चा उड़ते-उड़ते राजा कृष्णदेव राय तक... Read More

श्रम रहित परिश्रम

Updated on 13 May, 2020, 6:00
महर्षि वेदव्यास किसी नगर से गुजर रहे थे। उन्होंने एक कीड़े को तेजी से भागते हुए देखा। मन में सवाल उठा- एक छोटा सा कीड़ा इतनी तेजी से क्यों भागा जा रहा है? उन्होंने कीड़े से पूछा- ऐ क्षुद्र जंतु! तुम इतनी तेजी से कहां जा रहे हो? कीड़ा बोला-... Read More

दृष्टि में सब रखें

Updated on 12 May, 2020, 6:00
एक व्यक्ति ने कहा, 'सर्दी लग रही है। ठिठुर रहा हूं।' दूसरे ने कहा, 'जाओ, कपड़ा ओढ़ लो।' वह घर में गया और मलमल की चादर ओढ़ आया। आकर बोला, 'कपड़ा ओढ़ लिया, फिर भी ठंड लग रही है।' उसने कहा, 'भले आदमी! मैंने कपड़ा ओढ़ने के लिए कहा था।... Read More

वर्तमान में जिएं

Updated on 11 May, 2020, 6:00
मुनि ने सेठ की पुत्रवधू से पूछा, 'श्वसुरजी कहां हैं? उसने कहा, 'जूते की दुकान पर गए हैं।' श्वसुर उस समय आराधना-कक्ष में आराधना कर रहा था। उसने सुना, वह तत्काल आया और बोला, 'महाराज! मेरी पुत्रवधू ने असत्य कहा है। मैं आराधना कर रहा था। इसने जानते हुए भी... Read More

काम में तल्लीनता

Updated on 10 May, 2020, 6:00
एक साधक से पूछा गया-आप साधना करते हैं? उसने कहा, 'जब भूख लगती है, तब खा लेता हूं और जब नींद आती है, तब सो जाता हूं। यही है मेरी साधना।' उसने कहा, 'बड़ी सीधी बात है। यह तो मैं भी कर सकता हूं।' साधक से कहा, 'अच्छा आओ, भोजन... Read More

दौलत की चाह

Updated on 7 May, 2020, 6:00
संत जुनैद की एक झलक पाने और उनसे ज्ञान की बातें सुनने के लिए लोग बेकरार रहते थे। पर जुनैद दुनियावी चीजों से तटस्थ और निर्लिप्त रहते थे। वह खाने-पीने और अपने कपड़े से भी बेपरवाह रहते थे। वह हर समय घूमते रहते थे। जहां भी रात होती वह वहीं... Read More

 नफरत का बोझ

Updated on 6 May, 2020, 6:00
बहुत पुरानी कथा है। एक बार एक गुरु ने अपने सभी शिष्यों से अनुरोध किया कि वे कल प्रवचन में आते समय अपने साथ एक थैली में बड़े-बड़े आलू साथ लेकर आएं। उन आलुओं पर उस व्यक्ति का नाम लिखा होना चाहिए, जिससे वे नफरत करते हैं। जो शिष्य जितने... Read More

अपना दृष्टिकोण

Updated on 5 May, 2020, 6:00
एक कन्या ने अपने पिता से कहा, 'मैं किसी पुरातत्वविद् से विवाह करना चाहती हूं।'  पिता ने पूछा, 'क्यों?' कन्या बोली, 'पिताजी! पुरातत्वविद् ही एक ऍसा व्यक्ति होता है जो पुरानी चीजों को ज्यादा मूल्य देता है। मैं भी ज्यों-ज्यों पुरानी होती जाऊंगी, बूढ़ी होती जाऊंगी, मेरा मूल्य भी बढ़ता... Read More

संत की उदारता

Updated on 4 May, 2020, 6:00
संत बेनजोई के पास कई बालक शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते थे। वह अपने सभी शिष्यों की शिक्षा पूर्ण करने के बाद ही उन्हें वहां से जाने की अनुमति देते थे। वह उद्दंड व शरारती शिष्यों को भी आज्ञाकारी और संस्कारी बनाकर ही दम लेते थे। एक बार उनके... Read More

राजा की उदारता

Updated on 3 May, 2020, 6:00
राजा भोज के नगर में एक विद्वान ब्राह्यण रहते थे। एक दिन गरीबी से परेशान होकर उन्होंने राजभवन में चोरी करने का निश्चय किया। रात में वे वहां पहुंचे। सभी लोग सो रहे थे। सिपाहियों की नजरों से बचते हुए वह राजा के कक्ष तक पहुंच गए। स्वर्ण, रत्न, बहुमूल्य... Read More

आत्मबल के लिए

Updated on 2 May, 2020, 6:00
एक गरीब बुढ़िया थी। अपनी झोपड़ी में अकेली रहती थी। उसके पास एक गाय थी। बस उसी के सहारे वह अपना जीवन निर्वाह करती थी। पर्युषण पर्व चल रहा था। वह अपनी झोपड़ी में बैठी-बैठी रोज देखती थी कि गांव के लोग बहुत ठाट-बाट से पूजा की थाल और प्रसाद... Read More

विनम्रता का पाठ 

Updated on 1 May, 2020, 6:00
पंडित विद्याभूषण बहुत बड़े विद्वान थे। दूर-दूर तक उनकी चर्चा होती थी। उनके पड़ोस में एक अशिक्षित व्यक्ति रहते थे-रामसेवक। वे अत्यंत सज्जन थे और लोगों की खूब मदद किया करते थे। पंडित जी रामसेवक को ज्यादा महत्व नहीं देते थे और उनसे दूर ही रहते थे। एक दिन पंडित... Read More

धन का भार

Updated on 29 April, 2020, 6:00
पाटलिपुत्र में नाभिकुमार की गिनती सबसे संपन्न लोगों में होती थी। लेकिन अपार धन-संपत्ति होते हुए भी उन्होंने कभी दान नहीं दिया था। कई लोगों ने उन्हें इस बारे में कहा था पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया। एक रात उनके घर चोर ने सेंध लगाई। उसने सावधानी से घर का... Read More

रजा का खजाना

Updated on 28 April, 2020, 6:00
फारस के शासक साइरस अपनी प्रजा की भलाई में जुटे रहते थे। लेकिन खुद उनका जीवन सादगी से भरा था। वह रियासत की सारी आमदनी व्यापार, उद्योग और खेतीबाड़ी में लगा देते थे। इस कारण शाही खजाना हल्का रहता था। लेकिन प्रजा खुशहाल थी। एक दिन साइरस के दोस्त और... Read More

मृत्यु का अर्थ

Updated on 22 April, 2020, 6:00
मृत्यु एक शात सत्य है। यह अनुभूति प्रत्यक्ष प्रमाणित है, फिर भी इसके संबंध में कोई दर्शन नहीं है। अब तक जितने ऋषि-महर्षि या संत-महंत हुए हैं, उन्होंने जीवन दर्शन की चर्चा की है। जीवन के बारे में ऐसी अनेक दृष्टियां उपलब्ध हैं जिनसे जीवन को सही रूप में समझा... Read More

सबसे अच्छा सखा है ज्ञान 

Updated on 21 April, 2020, 6:00
आत्मा ही आनन्द का स्वरूप है। किसी भी सुखद अनुभूति में तुम आंखे मूंद लेते हो। जैसे जब किसी फूल को सूंघते हो, कोई स्वादिष्ट खाना चखते हो या किसी वस्तु को स्पर्श करते हो। दुख का केवल यही अर्थ है कि तुम अपरिवर्तनशील आत्मा पर केन्द्रित होने के बदले... Read More

भौतिकवाद से उपजी दुर्गति

Updated on 20 April, 2020, 6:00
ऊंचा महल खड़ा करने के लिए किसी दूसरी जगह गड्ढे बनाने पड़ते हैं। मिट्टी, पत्थर, चूना आदि जमीन को खोदकर ही निकाला जाता है। एक जगह टीला बनता है तो दूसरी जगह खाई बनती है। संसार में दरिद्रों, अशिक्षितों, दु:खियों, पिछड़ों की विपुल संख्या देखते हुए विचार उठता है कि... Read More

अहंकार से ज्ञान का नाश

Updated on 19 April, 2020, 6:00
अहंकार से मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो जाती है। अहंकार से ज्ञान का नाश हो जाता है। अहंकार होने से मनुष्य के सब काम बिगड़ जाते हैं। भगवान कण-कण में व्याप्त है। जहाँ उसे प्रेम से पुकारो वहीं प्रकट हो जाते हैं। भगवान को पाने का उपाय केवल प्रेम ही... Read More

सुखी जीवन के तीन सूत्र 

Updated on 18 April, 2020, 6:00
सुखी, स्वाभिमान एवं सम्मान के साथ जीवन जीने के तीन सूत्र हैं- उपयोगिता, भावना एवं कर्तव्य। उपयोगिता संबंधों को प्रगाढ़ करती है, भावना परिवार को मजबूत करती है और कर्तव्य घर, परिवार, समाज में एकता एवं समन्वय स्थापित करते हैं। उक्त प्रेरक विचार मुनि पुलकसागर महाराज ने प्रवचन माला में... Read More

प्रेम और सहयोग का नाम है परिवार

Updated on 17 April, 2020, 6:00
पारिवारिक सदस्यों के त्याग, सहयोग, स्वच्छता, प्रेम, संतुष्टि व व्यसनमुक्ति से ही परिवार संयुक्त और समृद्घिशाली बनता है। वे सौभाग्यशाली हैं जो संयुक्त परिवार में रह रहे हैं तथा जिन्हें माता -पिता का सान्निध्य प्राप्त हो रहा है। विश्व बंधुत्व की बात करने वालों को पहले अपने परिवार में बंधुत्व... Read More

 संयम से जीवन की उन्नति 

Updated on 16 April, 2020, 6:00
कार्तिय माहात्म्य प्रवचनों में पं. रामनिवास ब्रजवासी जी ने कहा शरद ऋतु में की जाने वाली उपासनाओं से जहाँ चंद्र किरणों से प्राप्त होने वाले अमृत तत्व से देह का सिंचन होता है, वहीं सूर्य की रश्मियों की प्रचुर ऊर्जा से उस अमृत तत्व की शरीर में स्थिरता होती है... Read More

वीरत्व की अलंकृति है क्षमा

Updated on 15 April, 2020, 6:00
क्षमा वीरत्व की अलंकृति है। दुर्बल और विवश व्यक्ति द्वारा उद्गीत क्षमा का माहात्म्य उतना प्रखर नहीं हो सकता। ज्ञान की स्फुरणा में मौन की सार्थकता है। शक्ति-संपन्नता में क्षमा की सार्थकता है और त्याग-भावना में आत्मगोपन या अप्रशस्ति की सार्थकता है। शक्ति के अभाव में स्वीकृत का कवच व्यक्ति... Read More

अमिट है कर्म का फल

Updated on 14 April, 2020, 6:00
यदि कर्म का फल तुरंत नहीं मिलता है तो यह नहीं समझना चाहिए कि उसके भले-बुरे परिणाम से हम सदा के लिए बच गये। कर्मफल ऐसा अमिट तथ्य है जो आज नहीं तो कल भुगतना ही पड़ेगा। कभी-कभी परिणाम में देर इसलिए होती है क्योंकि ईश्वर मानवीय बुद्धि की परीक्षा... Read More