Friday, 16 November 2018, 3:01 PM

जीवन मंत्र

रिमझिम बरसती बारिश की बूंदें! कितना सुकून देती हैं मन को

Updated on 30 July, 2015, 13:10
पहली बारिश और तुम्हारी याद ना आएं ये कैसे हो सकता है, बारिश का इंतजार वैसे तो सबको होता है पर सबसे ज्यादा उसे होता है जिसे बारिश, बारिश का मौसम पंसद हो और, हां सच्चे दिल से किसी से प्यार हो। बारिश में भीगना फुहारों के साथ मस्ती करना... Read More

ऐसी होती है आत्मा

Updated on 28 July, 2015, 7:22
संस्कृत शब्द 'आत्मा' का अनुवाद अक्सर अंग्रेजी में 'सोल' या फिर 'स्पिरिट' के रूप में किया जाता है। मगर इन तीनों शब्दों की जड़ें अलग-अलग हैं और अर्थ भी। 'स्पिरिट' ग्रीक मूल का है, 'सोल' ईसाई मूल का और 'आत्मा' हिंदू मूल का। ग्रीस में लोग मानते थे कि जब कोई... Read More

दान देने का संबंध स्वयं से है किसी और से नहीं

Updated on 26 July, 2015, 12:07
अगर आप कुछ दान करते हैं तो वह आपके उत्कर्ष से जुड़ा है। देते हुए दूसरे की स्थिति के बारे में ज्यादा आकलन ठीक नहीं है। दान देने का संबंध सिर्फ आपकी भावनाओं से है। अगर मन कहता है कि आपको कुछ देना चाहिए तो दीजिए और अगर मन नहीं... Read More

करें रिश्तों की साफ-सफाई

Updated on 21 July, 2015, 14:02
अगर झाड़-पोंछ न की जाए तो घर के कोने-कोने में धूल जम जाती है। ठीक इसी तरह हमारे रिश्ते-नातों पर अनजाने में सिलवटें पड़ जाती हैं। वक्त के साथ उन पर धूल की परतें भी जम जाती हैं। वजह कुछ भी हो सकती है। समय-समय पर यदि हम अपने रिश्तों... Read More

प्रार्थना से करें अंतस मन की पवित्रता

Updated on 19 July, 2015, 8:59
प्रार्थना करना लिखे हुए कुछ शब्दों को दोहराना भर नहीं है। प्रार्थना का अर्थ होता है परमात्मा का मनन और उसका अनुभव। प्लेटो ने कहा था,'आत्मा का खुद से बातचीत करना ही मनन कहलाता है।' जब हम आत्मा अर्थात अपने भीतर अवस्थित आत्म-तत्व से बातचीत करते हैं, तो वह प्रार्थना है... Read More

ये होते हैं स्वार्थ और परमार्थ के रंग

Updated on 18 July, 2015, 13:15
जो परमार्थ दिखावे के लिए होता है, वह स्वार्थ से भी बुरा है और जो स्वार्थ सबके हित में हो, वह परमार्थ से भी अच्छा है। परमार्थ को हम जितनी ऊंचाइयों के साथ देखते हैं, स्वार्थ को उतनी ही हेय दृष्टि से देखा जाता है। लेकिन मेरा मानना है कि... Read More

नहीं दरकेंगे रिश्ते

Updated on 16 July, 2015, 13:25
शादी के बाद डेटिंग करें तो मिलेगा क्वालिटी टाइम। कभी लांग ड्राइव पर निकल जाएं तो कभी फिल्म देख आएं। कभी दस मिनट रुककर आइसक्रीम खा लें तो गुजार सकते हैं बेहतरीन पल। हाल ही में आया एक सर्वे बताता है कि क्वालिटी टाइम की कमी से रिश्ते दरक रहे... Read More

जीवन में समता यानी संतुलन बहुत जरूरी है

Updated on 14 July, 2015, 13:13
जीवन में समता यानी संतुलन बहुत जरूरी है, लेकिन अधिकांश लोगों का जीवन असंतुलित बना हुआ है। हमने एक ऐसी मानसिक स्थिति का निर्माण कर रखा है कि सुख की स्थिति आने पर हम खुशी से उछल जाते हैं और दुख की स्थिति में मानो मुरझा जाते हैं जबकि हमें... Read More

यह है हमारे दुखी रहने का कारण, इससे ऐसे बचें

Updated on 14 July, 2015, 7:23
हम अपेक्षा के सागर में डूबते-उतराते रहते हैं, यही हमारे दुखी रहने का कारण है। यदि हम दूसरों से अपेक्षाएं न लगाकर, दूसरों को बदलने के बजाय खुद को बदलें, तभी हम अपेक्षाओं के सागर के पार उतर सकेंगे। एक अरसे बाद मुलाकात में एक मित्र बातों ही बातों में पते... Read More

भूत सिद्धि – शरीर को शून्य में विलीन करना

Updated on 11 July, 2015, 16:38
अगर किसी को पांच तत्वों पर सिद्धि प्राप्त हो, तो शरीर का त्याग करके उसे शून्य में विलीन किया जा सकता है। फिर शरीर का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता। बहुत से योगियों ने ऐसा किया है। तमिलनाडु में वल्लालर रामालिंगा आदिगालार नाम के एक योगी थे। एक दिन, वे एक... Read More

एकत्व-बोध की ऊर्जा

Updated on 11 July, 2015, 13:07
भेदभाव करने वाले अक्सर दुखी और निराश दिखाई देते हैं, जबकि समानता का व्यवहार करने वाले हमेशा प्रसन्न और ऊर्जावान। भारतीय दर्शन सभी जीवों में एकत्व की बात कहकर लोगों को अपनी ऊर्जा का सही उपयोग करने की सलाह देता है... एक सांप परिवार के साथ बिल में रहता था। इसी... Read More

मनुष्य को दूसरे से ईष्या नहीं रखना चाहिए जो ऐसा करता है वह सुखी नहीं रहता

Updated on 11 July, 2015, 13:01
इटारसी। श्री द्वारिकाधीश बड़ा मंदिर में इस समय पुरूषोतम मास की आखरी और चौथी कथा शिवपुराण की चल रही है। कथा व्यास आचार्य नरेन्द्र शास्त्री को सुनने सैकड़ो श्रद्घालु आ रहे है। श्रीमती शांतिदेवी पगारे एवं श्री महादेव पगारे की स्मृति में शिव पुराण का आयोजन किया गया है। कथा... Read More

जीवन में जागृति नितांत आवश्यक है

Updated on 9 July, 2015, 12:04
जीवन में जागृति नितांत आवश्यक है। जीव की परमगति में जागृति का विशेष महत्व है। हम कई बार सोते और जागते हैं, परंतु ध्यान देने योग्य बात यह है कि समय कभी नहीं सोता। अगर समय सो गया, तो हम और आप सब हमेशा के लिए सो जाएंगे। सोये रहने... Read More

हम जो देते हैं वही हमारा गुण बन जाता है

Updated on 9 July, 2015, 7:27
पानी, हवा, अंतरिक्ष और पूरा जगत ही रंगहीन है। यहां तक कि जिन चीजों को आप देखते हैं, वे भी रंगहीन हैं। रंग केवल प्रकाश में होता है। आप जो भी रंग चाहते हैं, वे सभी सिर्फ प्रकाश में है। अगर प्रकाश किसी वस्तु पर पड़ता है और वह वस्तु कुछ... Read More

दादी से दोस्ती

Updated on 8 July, 2015, 13:29
मम्मी-पापा के पास तो बच्चों के लिए टाइम है नहीं। ऐसे में बच्चों से दिल की बात कौन पूछे? दादी मां ने इस मुश्किल का हल निकाल लिया है। वे बन गई हैं उनकी हमजोली। स्कूल के किस्से ही शेयर नहीं करतीं, पिज्जा-बर्गर में भी बराबर का साथ देती हैं।... Read More

जीवन-ऊर्जा का संरक्षण

Updated on 6 July, 2015, 13:02
अधिकांश लोग जीवन में सब कुछ अपने मन के अनुसार करने के लिए अपनी बहुमूल्य ऊर्जा को नष्ट करते रहते हैं। जब ऐसा नहीं हो पाता तो मन व शरीर पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है, हावभाव बदल जाते हैं, ऐसे में तनाव होना निश्चित है। विपरीत असर को झेलने... Read More

साधना की झाडू से दूर करें मन की चंचलता

Updated on 4 July, 2015, 9:23
मन के सदनुष्ठान बड़े कठिन हैं, क्योंकि मन अति चंचल है। मन प्राय:विक्षुब्ध सागर जैसा बना रहता है। विचारों की तरंगों पर तरंगों उठती रहती हैं। एक विचार पूरा न हो इतने में दूसरे अनेक विचार उठ खड़े होते हैं। जिन विचारों को स्थाई रूप देना चाहते हैं, वे गायब... Read More

मन की शुचिता को इस तरह बनाएं सौभाग्यशाली

Updated on 4 July, 2015, 9:23
दुःख से हम सब डरते हैं, यह जानते हुए भी सुख-दुख दोनों ही जीवन के अनिवार्य पहलू हैं और दोनों अस्थाई हैं। अध्यात्म की मान्यता है कि आत्मा ही परम आनंद है और दुख हमें आत्मा के निकट ले जाता है। केवल एक बात याद रखो कि तुम कितने सौभाग्यशाली हो।... Read More

सफल जीवन के मूलमंत्र

Updated on 3 July, 2015, 13:50
यह तो आपने भी सुना होगा कि परिश्रम और धैर्य से ही सफलता मिलती है, लेकिन आपका ध्यान अपने लक्ष्य पर बराबर रहना चाहिए। फिर सफलता को कोई आपसे दूर नहीं कर सकता - किसी भी कार्य को करते हुए असुरक्षा या नकारात्मक भाव मन में न लाएं। आप जब कार्य... Read More

30 टिप्स फिजूलखर्ची से बचने के

Updated on 30 June, 2015, 12:02
बचत..! काफी मुश्किल काम है इस दौर में यह। लेकिन एक कहावत यह भी है कि बूंद-बूंद से घड़ा भरता है। थोड़ी सी मेहनत, योजना और बुद्धिमत्त से इस बूंद-बूंद को बचाया जा सकता है। राशन, बिजली, गैजेट्स, कपड़ों, पेट्रोल या फोन बिल्स में थोड़ी कटौती संभव है। जानिए कैसे..! राशन... Read More

स्मार्ट महिला.. स्मार्ट खाता

Updated on 29 June, 2015, 12:12
डिजिटल दुनिया की जरूरत है कि स्मार्टली मैनेज हो आपकी बैंक डिपॉजिट। जानें कि कैसे एटीएम के इस्तेमाल से लेकर मोबाइल एलर्ट तक अब आपके साथ चौबीसों घंटे है ताकत अपने पैसे तक पहुंच और इस पर नियंत्रण की.. दिनभर की भागमभाग वाली जिंदगी में लगी स्मार्ट महिलाओं को चाहिए एक... Read More

भीतर की संपदा

Updated on 28 June, 2015, 11:14
बाहरी धन-संपदा से ज्यादा महत्वपूर्ण है भीतर की संपदा। अंतस के धनी बनकर ही हम सही मायने में सफल कहलाएंगे... कणाद ऋषि के बारे में किंवदंती है कि खेतों में जो अन्न कण पड़े रह जाते थे, उससे अपना पेट भरते थे, इसीलिए उनका नाम कणाद पड़ा। एक कथा है कि... Read More

ध्यान से हो मन का मैनेजमेंट

Updated on 27 June, 2015, 10:25
नींद की तरह ध्यान से भी हमें जैव-रासायनिक संतुलन प्राप्त होता है, जिससे हम भीतर-बाहर के सारे युद्धों में विजयी होने की क्षमता रखते हैं। ध्यान हमें मन को शांत तथा मौन रखते हुए सफलता का शिखर छूने में मदद करता है।   मौन के बिना सफलता वैसी ही है, जैसे गंध... Read More

सच बोलो पर मीठा भी बोलो

Updated on 27 June, 2015, 10:25
कभी-कभी व्यक्ति अपने चरित्र से, चिंतन से, स्वभाव से, व्यक्तित्व से, आचरण से, उपस्थिति से बहुत कुछ बोलता है। कहीं-कहीं ग्रंथों से संकेत दिए हैं कि व्यक्ति को बोलने की आवश्यकता नहीं है। बोलना तो व्यर्थ है।   महापुरुष मौन से ही संकेत दे देते हैं। उनका तो आचरण और उपस्थिति ही... Read More

योग आनंद मानव कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक है

Updated on 27 June, 2015, 10:08
योग आनंद का ऐसा स्नोत है जो मानव कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक है। योग से आनंद और सुख की प्राप्ति होती है और योगी का आचार-विचार परिष्कृत हो जाता है। भारतीय योग को जब विदेशों में 'योगा' नाम से प्रसिद्धि मिली, तब जन-मानस इसकी ओर कहीं ज्यादा आकृष्ट होने... Read More

प्रकृति और मनुष्य का अंतर संबंध

Updated on 26 June, 2015, 10:30
अपने आसपास प्रकृति कितने रूपों में खिलती और इठलाती है। यहां ही जीवन की प्रेरणा छुपी है। जीवन का रस छुपा है और जीवन के लिए संदेश भी। प्रकृति में बहुत कुछ निहित है।   मैं विश्वास करता हूं कि एक छोटे-से फूल के सौंदर्य में जो शक्ति छुपी हुई है, वह... Read More

समस्याओं को समझें मिलेगी शांति

Updated on 26 June, 2015, 10:29
आम आदमी ज्यादातर अपनी तात्कालिक समस्याओं जैसे अभाव, बेरोजगारी, बीमारी, द्वंद आदि में ही घिरा रहता है। तो जीवन के गहरे मुद्दों की ओर वह कैसे ध्यान दे सकता है? लेकिन इसका जवाब ढूढें तो पाएंगे कि हम तत्काल के प्रति ज्यादा चिंतित रहते हैं दूर के प्रति हमारी दृष्टि... Read More

जो आप नहीं हैं उसका दिखावा क्यों

Updated on 25 June, 2015, 10:38
अगर आप दिखावे के फेर में पड़ते हैं तो अपनी स्वाभाविकता को खोते हैं अपनी पहचान को खोते हैं और बदले में पाते कुछ भी नहीं। दूसरों की तरह दिखने का विचार हमारा बहुत नुकसान करता है। हर किसी के व्यक्तित्व में बहुत सारी खूबियां और कमियां होती हैं।   अपनी अच्छाइयों... Read More

अनुभवों से भरा हमारा जीवन

Updated on 25 June, 2015, 10:37
मैं मानता हूं कि जीवन आवश्यक रूप से सुख और दु:ख, आनंद और कष्ट, सफलता और असफलता तथा प्रकाश और छाया का मिला-जुला रूप है और जब तक हम इनका अतिक्रमण करने की क्षमता नहीं प्राप्त कर पाते, हमें इनको अपनी अध्यात्मिक प्रगति,आवश्यक पड़ाव ही मानना चाहिए।   और यह कि प्रत्येक... Read More

चालबाजियों में नहीं है जीवन का सुख

Updated on 24 June, 2015, 10:27
अगर हम खुद को श्रेष्ठ और बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं तो हमारे दिमाग में कई तरह की चालबाजियां आने पर भी हम उनमें भाग नहीं लेते। हम ईमानदारी से जीवन जीते हैं। चालाकियों के साथ हम दूसरों को प्रभावित तो कर सकते हैं लेकिन ये हमें... Read More