Monday, 21 May 2018, 10:29 AM

जीवन मंत्र

अपने सिर पर आई मौत को भी मात दे सकते हैं

Updated on 2 June, 2015, 11:55
महावीर एक गांव के पास से गुजर रहे थे। उनका शिष्य गोशालक उनके साथ था, जो बाद में उनका विरोधी हो गया। दोनों एक पौधे के पास से गुजर रहे थे। गोशालक ने महावीर से कहा, यह पौधा देखिए। क्या सोचते हैं आप, इसमें फूल लगेंगे या नहीं लगेंगे? महावीर... Read More

हमारे भीतर ही है प्रेरणा

Updated on 1 June, 2015, 13:39
हमारे रोजमर्रा के जीवन में चलने वाले अप्रत्यक्ष संग्राम को किसी हथियार से नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपी शक्ति से ही जीता जा सकता है। स्वामी विवेकानंद के इस कथन के मुताबिक जब प्रेरणा अंदर से आएगी, तभी आप अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकेंगे... बच्चा रोज स्कूल के मैदान... Read More

जब 'मन' नहीं होता तब होता है ध्यान

Updated on 31 May, 2015, 8:14
मन के माध्यम से ध्यान तक नहीं पहुंचा जा सकता। ध्यान इस बात का बोध है कि मैं 'मन' नहीं हूं। ध्यान चेतना की विशुद्ध अवस्था है। जहां न विचार होता है, न कोई विषय। साधारणत: हमारी चेतना विचारों से, विषयों से, कामनाओं से आच्छादित रहती है। जैसे कि कोई दर्पण... Read More

यहां छिपा हैं जिंदगी से परेशान लोगों के लिए समाधान

Updated on 29 May, 2015, 8:15
जीवन कई चुनौतियों से भरा है। इनके दबाव से कई मौकों पर लोग टूट जाते हैं। वे महसूस करते हैं कि जितनी समस्याएं सामने हैं उनका वे मुकाबला नहीं कर पाएंगे। कई मर्तबा लोग महसूस करते हैं कि वे दुनिया की सबसे खराब नौकरी या काम कर रहे हैं। कुछ महसूस... Read More

रिश्तों की डोरी में एक धागा मेरा एक तुम्हारा...

Updated on 28 May, 2015, 13:32
वो प्यार ही क्या जो चंद लफ्जों में बंध कर रह जाएं, ऊंच-नीच, जाति-धर्म और जन्म-उम्र से बंध जाएं। प्यार तो है बस मन का मिलना, ये आदत तो हर रंग संग रंग जाएं। ये मोहब्बत चीज क्या है? ये सवाल बार-बार जेहन में उठता है। सोचते-सोचते साल महिने और... Read More

हर सुबह एक नया जीवन, नए मन से इसे जियो

Updated on 24 May, 2015, 8:06
ज़िंदगी में बहुत कुछ ऐसा घटित होता है। जिसके कारण हम काफी परेशान हो जाते हैं। ऐसे में धार्मिक प्रवचन और सकारात्मक विचार ही हमें इन समस्याओं से उबारने में बहुत मदद करते हैं। ऐसे में क्रांतिकारी संत मुनिश्री तरुणसागर के कड़वे प्रवचन बहुत ज्यादा कारक सिद्ध होते हैं। मुनि... Read More

जब पत्नी हो सकती है प्रोफेशनल, तो पति क्यों नहीं हो सकता घरेलू

Updated on 23 May, 2015, 13:11
एक औरत घर, परिवार और बच्चे सब संभालती है। इतने सारे काम करती है पर उफ! तक नहीं करती पता है क्यों? क्योंकि उसके दिमाग में ये बचपन से डाला जाता है कि उसमें बहुत सहनशक्ति है, वो सारे काम कर सकती है और सबसे बड़ी बात जो उसके दिमाग... Read More

क्यों सताता है मौत का डर

Updated on 20 May, 2015, 12:31
मौत अपने साथ भय और दुःख लाती है, और मौत से सामना होने पर, आम तौर पर मानव खुद को असहाय पाता है। क्या बिना डरे मौत का सामना किया जा सकता है? लियेन: मुझे मौत के समय भय की गैरकुदरती प्रक्रिया से डर लगता है क्योंकि आपने कहा था कि आपके... Read More

धैर्य के साथ तलाशें जीवन का आनंद

Updated on 20 May, 2015, 9:13
जीवन एक बड़ा रहस्य है। जीवन को समझना वैसा ही है जैसे गद्य में छुपे पद्य को अनुभूत करना। प्रार्थना जीवन के प्रति हमारा विश्वास जमाने में मदद करती हैं। यह अलौकिक को समझने का दरवाजा है। अलौकिक शक्ति को तर्क के सहारे नहीं समझा जा सकता है उसे तो बस... Read More

परिवार से मिलने वाले संस्कार हमें खूबसूरती से तराशते हैं

Updated on 18 May, 2015, 11:39
जिस तरह एक अनगढ़ पत्थर को शिल्पी सुंदर मूर्ति में बदल देता है, उसी तरह परिवार से मिलने वाले संस्कार हमें खूबसूरती से तराशते हैं। अगर पकड़ लें इसकी मजबूत डोर, तो मिल जाएगा तरक्की का स्थायी ठौर... पतंग उड़ा रहे थे पिता। बेटा उन्हें ध्यान से देख रहा था। पतंग... Read More

आवश्यकता स्वयं को पहचानने की है

Updated on 16 May, 2015, 12:44
 स्वयं से स्वयं की पहचान यानी आंतरिक शक्ति का साक्षात्कार। आंतरिक शक्ति मनुष्य की जीवंत शक्ति होती है, जिसके बल पर वह ऐसे कार्य कर लेता है, जो आश्चर्यजनक होते हैं। यदि मनुष्य दृढ़ निश्चय कर लें तो वह किसी भी काम को आसानी से कर सकता है। सर्वप्रथम आवश्यकता... Read More

हृदय और मन को उन्नत बनाने वाला कार्य ही हमारा कर्तव्य है

Updated on 15 May, 2015, 12:35
कोई भी कार्य करने से पहले यह जानना आवश्यक है कि कर्तव्य क्या है? विभिन्न जातियों में, विभिन्न देशों में इसके संबंध में भिन्न-भिन्न अवधारणाएं हैं। एक व्यक्ति कहता है कि मेरे धर्मग्रंथ में जो लिखा है वही मेरा कर्तव्य है। दूसरा कहता है कि मेरे धर्मग्रंथ में जो लिखा... Read More

जीवन में व्युत्क्रम का सिद्धांत

Updated on 14 May, 2015, 12:16
जब हम विफलता पर चिंतन कर स्वयं में सुधार लाते हैं, तब हम सफलता का वरण करते हैं। व्युत्क्रम का सिद्धांत हमारे जीवन में काम आता है... बहुत छोटी अवस्था से ही कार्ल जैकोबी (कार्ल गुस्ताव जैकब जैकोबी) ने हर विषय पर गहरी पकड़ बना ली थी, लेकिन किशोरवय तक पहुंचते-पहुंचते... Read More

जिंदगी और बता तेरा इरादा क्या है

Updated on 12 May, 2015, 11:58
सफलता पाने के लिए हमें खुद से सही सवाल पूछने होंगे, तभी हम सही उत्तर पा सकेंगे...-संजू, अगर मैं तुम्हें दो रुपये दूं, थोड़ी देर बाद फिर दो रुपये दूं तो तुम्हारी जेब में कितने रुपये होंगे? संजू ने कहा -मैडम जी, पांच रुपये। -बेटा, जब मैं तुम्हें दो रुपये दे रही... Read More

जीवन हमेशा एक-सा नहीं रहता, परिवर्तन को स्वीकारें

Updated on 9 May, 2015, 12:43
जीवन हमेशा एक-सा नहीं रहता। परिवर्तन को स्वीकार कर ही हम अपनी हताशा-निराशा से उबर सकते हैं और समय के साथ चलकर अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं... धनी व्यक्ति को व्यवसाय में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। उसे लगने लगा कि उसकी जिंदगी में घटाटोप अंधेरा भर गया है। उसके... Read More

हंसी हर जगह है बस हंसने के बहाने ढूंढिए

Updated on 7 May, 2015, 7:03
कन्नड़ लेखक एच. योगनसिंहम् ने महर्षि कर्वे ( भारतरत्न 1958 धोंडो केशव कर्वे) की आत्मकथा 'लुकिंग-बैक' का कन्नड़ में अनुवाद किया था। उनसे सिर्फ पत्र व्यवहार द्वारा ही परिचय था पर महर्षि कर्वे से वह कभी मिले नहीं थे। एक बार जब वे पूना गए तो वे महर्षि कर्वे से भेंट... Read More

मिलेगी कॅरियर में कामयाबी

Updated on 5 May, 2015, 12:28
हम सभी अपने-अपने जीवन में आगे बढऩा चाहते हैं। यदि आप भी अपने कॅरियर में आगे बढऩा चाहती हैं तो अपनी योग्यता व कार्यक्षमता को पहचानें और उनका अपने स्तर से आकलन करें। अपनी शक्ति का आकलन किए बगैर आप आगे नहीं बढ़ सकतीं... कॅरियर काउंसलर रिद्धि सिंह का कहना है... Read More

खुशनुमा पल जिंदगी के

Updated on 4 May, 2015, 13:06
क्या पैसा खुशी दे सकता है? क्या धन से संतोष खरीदा जा सकता है? यदि कहें हां, तो ढेर सारे सवाल पैदा होंगे। लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं कि कल्याणकारी कार्यों में लगा धन आत्मसंतोष तो देता ही है, साथ ही जिंदगी के हर पल को बना... Read More

स्वयं को मूल्यहीन न समझें

Updated on 4 May, 2015, 7:20
व्यक्ति कई मौकों पर खुद को मूल्यहीन समझने लगता है। ऐसे में किसी भी तुलना से दूर रहते हुए खुद पर भरोसा रखकर आगे बढ़ना ही आपका मंत्र होना चाहिए। क्या वाकई मैं कुछ अच्छा काम नहीं कर रहा हूं? क्या मैं अपनी पूरी क्षमता से काम कर पा रहा हूं?... Read More

जानिए भ्रम और ब्रह्म के बीच का फर्क

Updated on 1 May, 2015, 8:41
संस्कृत भाषा में परम सत्य को 'ब्रह्म' का नाम दिया है। 'ब्रह्म' परम सत्य का साकार रूप है। इस परम संभावना को ग्रहण करने में अगर जरा चूक हो, तो 'भ्रम' की स्थिति बन जाती है। इसलिए कहा है कि अज्ञानता और ज्ञान में बस जरा सा फर्क है। इस परम... Read More

...टिस तब उठती है जब पहला प्यार अधूरा रह जाता है

Updated on 30 April, 2015, 13:33
न जाने कब से इस दिन का इंतजार था, बस मैं और आप हो दिल से दिल की बात हो, रूहों की सौगाते हो कुछ जवां रातें हो, प्यार हो....इश्क हो.....मुहब्बतें हो। इनके सिवा कुछ न हो । अगर मैं प्यार की बातें करूं तो शायद ही कोई ऐसा होगा।... Read More

न होगी आपस में तकरार

Updated on 27 April, 2015, 13:06
अक्सर पति-पत्नी के बीच आपस में तकरार बेहद साधारण बातों की वजह से होती है। अगर दोनों थोड़ी सी समझदारी दिखाएं तो इस तकरार को आसानी से टाला जा सकता है - आपस में बहस से बचना चाहिए, इससे हासिल कुछ नहीं होता। मूल बात गहरे दब जाती है और फालतू... Read More

एक के साथ दूसरी बीमारियों का खतरा

Updated on 25 April, 2015, 13:46
अकसर लोग मुख्य बीमारी के साथ पैदा होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर दोगुनी मुसीबत का सबब बन जाती है। सेहत की हिफाजत के लिए ऐसी शैडो डिजीज के बारे में जानना बहुत जरूरी है। पुरानी कहावत है कि कोई भी मुसीबत अकेले नहीं आती।... Read More

कैसी हो आपकी पहली मुलाकात

Updated on 24 April, 2015, 13:03
सभी चाहते है कि किसी से पहली बार मिलने पर ऐसी छाप छोड़ें कि उसके मन-मस्तिष्क में उम्र भर के लिए अच्छी राय बन जाए, लेकिन ज्यादातर लोगों को यह तकनीक ही नहीं आती कि पहली ही मुलाकात में कैसे किसी को हमेशा के लिए अपना प्रशंसक बनाया जा सकता... Read More

मित्रों से मिलती है खुशी

Updated on 22 April, 2015, 12:22
सच्चे दोस्त जीवन के हर मोड़ पर साथ देते हैं। इस बात से आप भी सहमत होंगी कि वे लोग तकदीर वाले होते हैं, जिन्हें अच्छे दोस्त मिलते हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि यह एक अध्ययन का निष्कर्ष है। जर्मनी में हुए एक अध्ययन के अनुसार अच्छे... Read More

खुद पर है कितना भरोसा

Updated on 21 April, 2015, 12:52
अपने सोचे कामों के लिए आप किसी पर भी निर्भर नहीं रहतीं या अपनी असफलताओं के लिए दूसरे को जिम्मेदार ठहराती है? आप आत्मनिर्भर है या टालू प्रवृलि की, वास्तविकता जानने के लिए कुछ प्रश्नों का जवाब ईमानदारी से दें 1. आपने दोस्तों के साथ घूमने का प्रोग्राम बनाया हो और... Read More

मां ही मां को पहचाने

Updated on 20 April, 2015, 13:31
देखो-देखो कैसे हँस रही है, तुम जब छोटी थी तो बिल्कुल ऐसे ही हँसती थी। पता नहीं बड़ी होकर कैसी बनेगी, लेकिन अभी तो तुम्हारी ही डुप्लीकेट लग रही है। मुझे तो वह दिन याद आ रहा है जब तुमने मेरी गोद में अपनी आंखें खोली थीं। कुछ इसी तरह... Read More

सोच-समझ कर दें सलाह

Updated on 17 April, 2015, 13:29
हमारे बीच कुछ ऐसे भी लोग होते हैं, जो लोगों की पूरी बात सुनने-समझने से पहले ही अपनी सलाह देने को आतुर रहते हैं। इससे कई बार बड़ी विचित्र और हास्यास्पद स्थिति पैदा हो जाती है। लोग ऐसे व्यक्तियों को देखकर उनसे कतराने लगते हैं। कहीं आपका नाम भी ऐसे... Read More

वास्तव में वही धनवान है

Updated on 15 April, 2015, 11:57
सफल और सार्थक जीवन का सबसे बड़ा आधार-सूत्र संतोष है। संतोष के परम सुख के विषय में एक संत ने कहा है कि चाह से ही चिंता उत्पन्न होती है। चिंता ही दुख का कारण है। जिसकी चाहत समाप्त हो गई है वह प्रसन्न है, जितना है उसी में खुश... Read More

जीवन एक दर्पण है

Updated on 15 April, 2015, 11:54
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच:॥18-66॥ अर्थ : सभी धर्मों को त्यागकर केवल मेरी शरण में आ जाओ...मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्ति दिला दूंगा, इसलिए शोक मत करो...। व्याख्या : श्रीकृष्ण अकर्मण्य होने की शिक्षा नहीं दे रहे हैं। वे पहले ही कह चुके हैं कि परिणाम की... Read More